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Mother's Day Special- Poetry from A Mother and A Scientist


By: Dr. Geeta Chauhan
Principal Scientist (Division of Livestock Product Technology)
ICAR-Indian Veterinary Research Institute,  Izatnagar, Bareilley (U.P.)
Email ID: gchauhan2006@rediffmail.com




माँ
माँ, छोटा सा शब्द नहीं,
पूर्ण ब्रह्म आकर है
जीवन का आधार तू ही,
तू सारा संसार है
मेरे नन्हे से मुख में,
वो कौर खिलाना नन्हे नन्हे

 तेरे सीने से लिपट मिले,
बेफिक्र नींद, मीठे सपने
तेरे चहरे की झुर्री में,
बचपन मेरे साकार है
माँ, छोटा सा शब्द नहीं,
पूर्ण ब्रह्म आकर है
तूने अश्रु घूँट पिए,
पर आँख मेरी नम होने न दी
तिल-तिल जलती रही दिए सी,
आभा मेरी कम होने न दी
आज मिली जो मंजिल मुझको,
ये तेरा ही प्यार है
माँ, छोटा सा शब्द नहीं,
पूर्ण ब्रह्म आकर है
हांलाकि अब मैं हुई बड़ी,
और बचपन पीछे छूट गया
वो थपकी और लोरियों का,
अनवरत सिलसिला टूट गया
कड़ी धूप से मुझे बचाने,
अब भी आँचल तेरा तैयार है ।
माँ, छोटा सा शब्द नहीं,
पूर्ण ब्रह्म आकर है
नमन तेरे चरणों को माते,
तेरे नयनों को सहज प्रणाम
नमन तेरे जज्बे को माते,
निष्कपट भाव को मेरा सलाम
हर रिश्ता मिल सकता जग में,
पर प्यार तेरा त्यौहार है
माँ, छोटा सा शब्द नहीं,
पूर्ण ब्रह्म आकर है
डॉ गीता चौहान (प्रधान वैज्ञानिक)भा कृ अनु प-भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान
इज़्ज़तनगर, बरेली (उ. प्र.)
Email ID: gchauhan2006@rediffmail.com


Mother's Day Special- Poetry from A Mother and A Scientist Mother's Day Special- Poetry from A Mother and A Scientist Reviewed by Kirti Kumari on Saturday, May 09, 2020 Rating: 5

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